रविवार, 29 जनवरी 2012

इस मंच के निर्माण का विचार सिर्फ एक  व्यक्ति का रहा,पर इस तरह के विचार हम सब के मन में सदा  रहते ही है आखिर हम सब ही गौ माता के प्रति सवेद्नाएं रखते है ,वो बात अलग है के कुछ न कर पाने के कारण ये विचार मन में ही दबे रहते है ,पर जब भी सही मौका मिले ये विचार जाग्रत होकर कुछ करने की चाह जगाते है हम में.
ये ही कारण रहा के बहुत ही कम समय अवधि में कई लोग इस मंच से जुड़े,कुछ ने अपना समर्थन जाहिर किया तो कुछ ने आगे बढ़ कर कुछ करने की इच्छा जाहिर की और खुद को मंच से जोड़ा  ,आपस में काफी विचार विमर्श हुआ , किस तरह जनजाग्रति के इस कार्य को आगे लेकर जाया जाये,जो लोग इस कार्य से जुड़े है उन से ,कई गौशालों से सम्पर्क करके इस विषय में जानकारी प्राप्त की गयी ,कई सकारात्मक तो कई नकारात्मक पहलु नज़र आये ,'गौ वंश रक्षा मंच ' की क्या कार्य प्रणाली रहेगी इस पर काफी विचार मंथन हुआ अभी हम लोग जिस निष्कर्ष पर पहुंचे वो इस प्रकार है.....

जनसाधारण को  इस विषय से जोड़ने के प्रयास में पहला कदम 
गौ सेवा,गौ रक्षा के लिए होने वाले कार्य की जानकारी सब तक 
समय -२ पर पहुंचाते  रहना ......
हर क्षेत्र की गौशाला का पता और संपर्कसूत्र की जानकारी उपलब्ध 
करवाना 
हर एक क्षेत्र के कुछ लोगो का आपस में मेल जुल बढ़ाने को प्रेरित करना 
हर व्यक्ति के पास इतना वक्त नहीं होता के गौ शाला तक स्वंम  पहुच पाए 
और हम जिस स्थान पर रहेगे यदि उस ही स्थान तक हमारी दी हुई मदद 
पहुंचेगी तो हम भावनात्मक रूप से भी ,उस स्थान से अधिक जुड़ाव महसूस 
करेगे ,और गर्व महसूस करेगे के हमारे क्षेत्र की गौ शाला में कुछ योगदान हमारा भी
 है ,चाहे वो बहुत ही थोडा हो.लोगों में एक ये भ्रम भी व्याप्त है के गौशाला में धन ही दिया जाता है 
जबकि ऐसा नहीं है ,यदि हम लोग बहुत ही थोडा थोडा पैसा भी डाले और कुछ 
राशि जमा होने पर गौ के लिए चारा,आटा या खाने का अन्य सामान खरीद कर दे 
दिया जाये तो गौशाला में सहर्ष स्वीकार्र किया जाता है ,और हमारी ये आशंका 
भी समाप्त हो जाती है के पैसे का सदुपयोग किया भी जायेगा या नहीं 
कुछ स्थान की गौशाला से जुड़े लोग तो प्रभात फेरियां भी निकालते है 
जिस में हर घर से आटा ,सूखी या खाने का अन्य सामान एकत्रित करके गौ 
की भूख को शांत किया जाता है,सारांश ये है के जो लोग कुछ करना चाहते है और 
राह बना ही लेते है ,यदि धन से मदद नहीं कर पाते तो तन से मदद करके गौ माता के 
प्रति अपने फर्ज़ को पूरा करने की कोशिश करते है ,अगर गौ को रहने को स्थान मिले 
और खाने को भोजन तो सड़कों पर उनका धुमना भी खत्म हो और उन्हें बचाने के प्रयास किये जाए तो
गौ हत्या भी बंद हो ,कुछ लोगों को लगता है के इस विषय पर सिर्फ बाते होगी है काम नहीं होता पर ये 
सच्चाई नहीं है ,पिछले कुछ सालों  से जनसाधारण के प्रयास के कारण ही गौशालाओं की संख्या में वृद्धि 
हुई है और लाखों निराश्रित गायों को आश्रय और खाना मिलता है ,इश्वर ने आप को इतना दिया है क्या आप कुछ रोटियाँ या कुछ आटा उसे नहीं दे सकते जिसे हम माँ कहते है?? सोचिये और अपने क्षेत्र की किसी ऐसी ही संस्था से जुड़िये ,यदि आप इस विषय में कोई जानकारी चाहे ,इस विषय पर कुछ लिखना कहना चाहे तो सादर आमंत्रित है 
यदि आप किसी गौशाला से पहले से ही जुड़े है तो अपने बारे में जानकारी अवश्य दें,वो जानकारी ब्लॉग पर रखी जाएगी ताकि आप के द्वारा किये जा रहे पुण्यकार्य से और लोग भी प्रेरणा लें सके
कोई भी जानकारी लेने या देने के लिए सम्पर्कसूत्र = raadheji@gmail.com

 गौ वंश रक्षा मंच gauvanshrakshamanch.blogspot.com
  

10 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर पोस्ट..
    आपने मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी दी ,आभार.
    मेरी ग़ज़ल आपने fb पर share करने की सूचना दी,कृपया मेरी पोस्ट वहाँ मेरे नाम के साथ शेयर करें. और हाँ,आपको fb पर ढूंढूंगा कैसे?
    fb पर आपके नाम के कई लोग हैं.यदि अपनी id बता दें तो ढूंढ पाऊँगा.
    मेरी id है :-kunwar.kusumesh@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. आवंति जी,लेख या कोई रचना आपके इस पोस्ट के अनकूल होगी,मै तत्काल मेल कर दूँगा,...

    welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....

    उत्तर देंहटाएं
  3. शोचनीय दशा है, संस्कृति को सहेजना है तो गायों का स्तर उठाना होगा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. अच्छा लगा जानकर..... सराहनीय और अनुकरणीय....

    उत्तर देंहटाएं
  5. सराहनीय प्रयास, शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  6. गायों के स्तर को ऊपर उठाने के लिए सभी को आगे आना चाहिए

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....
    खबरनामा की ओर से आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही सराहनीय प्रयास है अवंती जी.

    हमारे यहाँ गौशाला के उत्थान के लिए बहुत से लोग जुड़े हैं.
    हर मंगल को मेरा यहाँ 'गीता गोष्ठी'की आरती में
    जो भी चढावा आता है,वह सब गौशाला को दिया जाता है.
    समय समय पर श्रद्धालु जन अपना अलग से भी दान देते रहते हैं.
    १२ साल से अधिक से गौशाला से ही दूध आता है.
    गाय सेवा में सभी को सहयोग करना चाहिये.

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी यह पहल सराहनीय और अनुकरणीय है। आशा है जानकारीपूर्ण पोस्ट्स आती रहेंगी। आपकी सदिच्छा के लिये हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  10. आप के विचार उच्चतम है....आपका प्रयास सराहनीय है...हमारी तरफ से इस पावन कार्य के लिए पूरा समर्थन है!

    उत्तर देंहटाएं