इस मंच की स्थापना का मूल उद्देश्य गौ वंश की रक्षा हेतु जनमानस में संवेदना का संचार और जागृति लाना
शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012
गुरुवार, 12 अप्रैल 2012
बुधवार, 14 मार्च 2012
गिरीश पंकज जी के एक उपन्यास के बारे में पढ़ा ख़ुशी हुई पढ़ कर
आप भी जानिये उन के उपन्यास के बारे में उन ही के शब्दों में
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आप भी जानिये उन के उपन्यास के बारे में उन ही के शब्दों में
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२४० पेज के इस उपन्यास में भारतीय गायों की दुर्दशा का वर्णन है. अनेक ज्ञात-अज्ञात गो-कथाये भी है. जिन्हें अपने हिसाब से कुछ और रोचक बनाने की कोशिश की है. उपन्यास में मुज़फ्फर भाई नामक एक पात्र है जो गो सेवा में रत है. उसकी अपनी गौ शाला है. मुझे सुखद आशचर्य हुआ जब जोधपुर प्रवास के दौरान पता चला कि वहा एक मुस्लिम बंधु ''प्रगतिशील मुस्लिम गौ शाला' चला रहे है. जो कल्पना मैंने की, उसे सार्थक देखकर खुशी हुई.गो ह्त्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध की मांग भी मैंने पात्रों के माध्यम से उठाई है. उपन्यास सर्वप्रिय प्रकाशन, दिल्ली से छपा है. कीमत १५०/-. रायपुर में वैभव प्रकाशन में उपलब्ध है. प्रकाशक डा.सुधीर शर्मा (9425358748) से संपर्क किया जा सकता है.
गिरीश पंकज
रविवार, 11 मार्च 2012
गाय
- गाय का दूध अमृत के समान है, गाय से प्राप्त दूध, घी, मक्खन से मानव शरीर पुष्ट बनता है।
- गाय के गोबर का प्रयोग चुल्हें बनाने, आंगन लिपने एवं मंगल कार्यो में लिया जाता है, और यहाँ तक की गाय के मूत्र से भी विभिन्न प्रकार की दवाइयाँ बनाई जाती है, गाय के मूत्र में कैंसर, टीवी जैसे गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता होती हैं, जिसे वैज्ञानिक भी मान चुके है, तथा गौ-मूत्र के सेवन करने से पेट के सभी विकार दूर होते हैं।
- भारतीय संस्कृति के अनुसार गाय ही ऐसा पशुजीव है, जो अन्य पशुओं में सर्वश्रेष्ठ और बुद्धिमान माना है।
- ज्योतिष शास्त्र में भी नव ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पाने के लिये गाय का ही वर्णन किया गया हैं।
- यदि बच्चे को बचपन में गाय का दूध पिलाया जाए तो बच्चे की बुद्धि कुशाग्र होती है।
- गाय की सेवा से भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं।
- हाथ-पांव में जलन होने पर गाय के घी से मालिश करने पर आराम मिलेगा।
- शराब, गांजे या भांग का नशा ज़्यादा हो जाय तो गाय का घी में दो तोला चीनी मिलाकर देने में 15 मिनट में नशा कम हो जायेगा।
- जल जाने वाले स्थान या घाव को पानी से धोकर गाय का घी लगाने से फफोले कम हो जाते हैं और जलन कम हो जाती है।
- बच्चों को सर्दी या कफ की शिकायत हो जाये तो गाय के घी से छाती और पीठ पर मालिश करने से तुरन्त आराम मिलता है
- किसी मनुष्य को अगर हिचकी आये तो उसे रोकने के लिये आधा चम्मच गाय का घी पिलाने से हिचकी रुक जाती है।
- यदि किसी मनुष्य को सर्प काट जाये तो उसे 70 या 150 ग्राम गाय का ताजा घी पिलाकर 40-50 मिनट बाद जितना गर्म पानी पी सकें, पिलायें। इसके बाद उल्टी-दस्त होंगे, इसके बाद विष का प्रभाव कम होने लगेगा।[1]
वैज्ञानिक महत्त्व
- गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है।
- गाय के मूत्र में पोटेशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड होता है, दूध देते समय गाय के मूत्र में लेक्टोज की वृद्धि होती है। जो हृदय रोगों के लिए लाभकारी है।
- गाय का दूध फैट रहित परंतु शक्तिशाली होता है उसे पीने से मोटापा नहीं बढ़ता तथा स्त्रियों के प्रदर रोग आदि में लाभ होता है। गाय के गोबर के कंडे से धुआं करने पर कीटाणु, मच्छर आदि भाग जाते हैं तथा दुर्गंध का नाश होता है।
- गाय के समीप जाने से ही संक्रामक रोग कफ सर्दी, खांसी, जुकाम का नाश हो जाता है। गौमूत्र का एक पाव रोज़ सुबह ख़ाली पेट सेवन करने से कैंसर जैसा रोग भी नष्ट हो जाता है।
- गाय के सींग गाय के रक्षा कवच होते हैं। गाय को इसके द्वारा सीधे तौर पर प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है। यह एक प्रकार से गाय को ईश्वर द्वारा प्रदत्त एंटीना उपकरण है।
- गाय की मृत्यु के 45 साल बाद तक भी यह सुरक्षित बने रहते हैं। गाय की मृत्यु के बाद उसके सींग का उपयोग श्रेठ गुणवत्ता की खाद बनाने के लिए प्राचीन समय से होता आ रहा है।
- गाय के गोबर में विटामिन बी-12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रेडियोधर्मिता को भी सोख लेता है। हिंदुओं के हर धार्मिक कार्यों में सर्वप्रथम पूज्य गणेश उनकी माता पार्वती को गाय के गोबर से बने पूजा स्थल में रखा जाता है।
पर्यावरण
गाय की उपस्थिति का पर्यावरण के लिए एक महत्त्वपूर्ण योगदान है, प्राचीन ग्रंथ बताते हैं कि गाय की पीठ पर के सूर्यकेतु स्नायु हानिकारक विकिरण को रोक कर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं।कृषि
कृषि में गाय के गोबर की खाद्य, औषधि और उद्योगों से पर्यावरण में काफ़ी सुधार है। जुताई करते समय गिरने वाले गोबर और गौमूत्र से भूमि में स्वतः खाद डलती जाती है। प्रकृति के 99% कीट प्रणाली के लिये लाभ दायक है, गौमूत्र या खमीर हुए छाछ से बने कीटनाशक इन सहायक कीटों को प्रभावित नहीं करते एक गाय का गोबर 7 एकड़ भूमि को खाद और मूत्र 100 एकड़ भूमि की फसल को कीटों से बचा सकता है।==========================================================================
(ये पोस्ट भारत ज्ञान कोष से साआभार ली गयी है )
मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012
श्री गोपाल गौशाला
एक परिचय
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श्री गौपाल गौशाला झुंझुनू शेखावाटी क्षेत्र की प्राचिनतम गौशाला है यह गौशाला राजस्थान के शेखावाटी अंचल की राणी सती दादी की नगरी झुंझुन मे स्थित है जिसकी स्थापना लगभग 110 वर्ष पहले हुई थी। इस गौशाला की स्थापना श्री हरिनारायणजी नाजिम की प्रेरणा व सहयोग से हुई थी। जिसे बाद मे श्री जमनाधरजी टीबडा व श्री मख्खनलालजी खेतान ने इसकी तन मन धन से सेवा कर प्रगति के नए सोपान पर पहुचाया।
गौशाला की सेवा अनेक गौ भक्त करते आए है। वर्तमान मे श्री ताराचंद गुप्ता व श्री सुभाष क्यामसरिया के मार्गदर्शन व अन्य सहयोगियो की देखरेख में गौशाला का काम चल रहा है।
वर्तमान में गौशाला में 560 गाये हैं जिनके लिए 32 आश्रमगृह, शैड निर्मित है। गौशाला मे 42 कर्मचारी है जो सेवा भाव से कार्य मे लगे रहते है तथा गायो की सेवा के लिए एक डॉक्टर भी नियुक्त है।
गौशाला प्रांगण एक बडी भूमि पर स्थित है जिसमे भवन, मकान, गोदाम व नोहरा, टिनशैड कैचुआ प्लांट आदि बनाये गए है
गौ सेवार्थ अपील
श्री गोपाल गौशाला द्वारा गौ माता की सेवार्थ निम्न दान राशि निश्चित की गयी है.| एक गाय माता की सेवार्थ एक वर्ष का खर्चा : | ७०००/- रु. |
| एक गाय माता का आजीवन गोद का खर्चा : | १०००००/- रु. |
| एक दिन का गौशाला का खर्चा : | २१०००/- रु. |
| गाय रसोई छानी सहित : | १५०००/- |
| गाय रसोई : | ११०००/- रु. |
| हरा चारा एक दिन का : | ७०००/- रु. |
| छानी एक दिन की : | ५०००/- रु. |
| गुड़ कट्टा : | ११००/- रु. |
| जौ एक क्विंटल : | ११००/- रु. |
| खल एक कट्टा : | ६००/- रु. |
संपर्क सूत्र
अध्यक्ष – श्री ताराचंद गुप्ता (Mobile No. 09413366833)
मंत्री – श्री सुभाष क्यामसरिया (Mobile No. 09571601430)
कोषाध्यक्ष – श्री संजय नांगलिया (Mobile No. 09314013546)
श्री गोपाल गौशाला, झुंझुनू – 333001, राजस्थान.
फ़ोन नं. 01592-232729
शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012
गौ सेवा से सम्बन्धित कुछ खबरें
चित्तौडग़ढ़। बारावफात के उपलक्ष्य में गौशाला में नूरी सूनी अंजुमन संस्था द्वारा गायों को हरा चारा एवं गुड़ खिलाया गया।
नूरी सूनी अंजुमन संस्था के संस्थापक इकबाल खिलजी ने बताया ५ फरवरी को हजरत मोहम्मद स.आ.व. जन्मोत्सव की खुशी में जश्ने ईद मिल्लादुन्नबी मनाई जाएगी। इस उपलक्ष्य में गोपाल गौशाला पर जुम्मे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय द्वारा मुक पशु गायों को हरी घास एवं गुड़ खिलाया गया।
इस अवसर पर पूर्व अंजुमन सदर सैय्यद लियाकत अली, पूर्व संगठन मंत्री गुलाम नबी पहलवान, अमन अराकीन कमेटी के सदर निसार खारिया, पूर्व सदर अमीर खान एवं अन्य पदाधिकारी कार्यरत थे।
नूरी सूनी अंजुमन संस्था के संस्थापक इकबाल खिलजी ने बताया ५ फरवरी को हजरत मोहम्मद स.आ.व. जन्मोत्सव की खुशी में जश्ने ईद मिल्लादुन्नबी मनाई जाएगी। इस उपलक्ष्य में गोपाल गौशाला पर जुम्मे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय द्वारा मुक पशु गायों को हरी घास एवं गुड़ खिलाया गया।
इस अवसर पर पूर्व अंजुमन सदर सैय्यद लियाकत अली, पूर्व संगठन मंत्री गुलाम नबी पहलवान, अमन अराकीन कमेटी के सदर निसार खारिया, पूर्व सदर अमीर खान एवं अन्य पदाधिकारी कार्यरत थे।
(२)
मानसा, 8 फरवरी (मित्तल): गौशाला में समाज सेवी नङ्क्षरद्र कुमार ङ्क्षनदी व उनकी पत्नी राज रानी ने अपनी विवाह की सिल्वर जुबली मौके पर गऊओं को सवामणि व हरा चारा डाला। इस मौके पर मधू बाला, अवशीश ङ्क्षजदल, बाविका ङ्क्षजदल, संजीव गुप्ता, रमेश ङ्क्षजदल, अशोक कुसला, विजय धीर आदि उपस्थित थे। इसके अलावा हरविन्द्र सिंह पुत्र मिट्ठू सिंह ने जन्मदिन पर, भागवती देवी पत्नी हेमराज की बरसी पर, मुनीश कुमार की विवाह की वर्षागांठ पर सवामणि डाली गई। गौशाला के अध्यक्ष अशोक नंगला ने कहा कि अगर हर व्यक्ति इसी तरह समाज सेवी कदम उठाए तो यह पशु कभी भूखे न मरें।
(३) हरियाणा में ३८५ गौशालाओं में २ लाख ६० हजार के करीब गौ वंश की देखभाल की जाती है
(४)हर जेल में खुले गौशाला
भीलवाड़ा। बंदियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने एवं उनमें करूणा रस का संचार करने के लिए हर जेल में गौशाला होनी चाहिए। राजस्थान में इसके लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। यह बात राष्ट्रीय जैन संत कमल मुनि "कमलेश" ने रविवार अपराह्न शास्त्रीनगर अहिंसा भवन में गौ ब्राण्ड्स विकास समिति की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
उन्होंने गौ उत्पादों को निरोगी काया का आधार बताते हुए कहा कि देश के पांच राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा की कई जेलों में गौशालाएं स्थापित हो चुकी हैं। गौसेवा का कार्य करने से इन जेलों में करीब चालीस फीसदी बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की बात सरकारी अध्ययनों में भी साबित हुई है।
अलग से गौसेवा मंत्रालय खोलने की पैरवी करते हुए मुनि ने गौमाता को राजकीय पशु का दर्जा देने की मांग उठाई। उन्होंंने कहा कि तहसील स्तर पर गौशाला खोलने के साथ ही देश के 30 लाख आश्रमों में प्रत्येक को 100-100 गायें सौंप दी जाए तो उन्हें कत्लखानों से बचाया जा सकता है।
भीलवाड़ा। बंदियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने एवं उनमें करूणा रस का संचार करने के लिए हर जेल में गौशाला होनी चाहिए। राजस्थान में इसके लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। यह बात राष्ट्रीय जैन संत कमल मुनि "कमलेश" ने रविवार अपराह्न शास्त्रीनगर अहिंसा भवन में गौ ब्राण्ड्स विकास समिति की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
उन्होंने गौ उत्पादों को निरोगी काया का आधार बताते हुए कहा कि देश के पांच राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा की कई जेलों में गौशालाएं स्थापित हो चुकी हैं। गौसेवा का कार्य करने से इन जेलों में करीब चालीस फीसदी बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की बात सरकारी अध्ययनों में भी साबित हुई है।
अलग से गौसेवा मंत्रालय खोलने की पैरवी करते हुए मुनि ने गौमाता को राजकीय पशु का दर्जा देने की मांग उठाई। उन्होंंने कहा कि तहसील स्तर पर गौशाला खोलने के साथ ही देश के 30 लाख आश्रमों में प्रत्येक को 100-100 गायें सौंप दी जाए तो उन्हें कत्लखानों से बचाया जा सकता है।
(खबरों के स्रोत्र = जागरण ,केसरी समाचार,पत्रिका ,गूगल)
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